बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम बख्तियार खिलजी के नाम पर क्यों

Bakhtiyarpur railway station name on bakhtiyar khilji

बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम  बख्तियार खिलजी के नाम पर क्यों

जब किसी बात को लेकर सीने में खंजर चुभने लगे तो वह बात हमें जरूर बताइएगा क्योंकि आज हम भी कुछ वैसा ही बात करने आए है बात बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पटना जिले का एक छोटे से गांव के रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया और उस इंसान के नाम पर रख दिया गया जिसनें सिर्फ अपनी सनक और अपनी अंतरात्मा की शांति के लिए हमारे विश्व प्रसिद्ध विश्व विख्यात विश्वविद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय को जला दिया था |

जी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन किसी और के नाम पर नहीं बल्कि बख्तियार खिलजी के नाम पर है अगर किसी ऐसे इंसान का नाम बार-बार लेना पड़े वह भी अपनी जगह के नाम के लिए तो सीने में खंजर नहीं चुभे तो और क्या होगा |

बात सही गलत की नहीं करते बात यह करते हैं कि हम आज उस इंसान को इज्जत दे रहे हैं जो कभी हमारे बिहार के सबसे बड़े शिक्षा जगत को ध्वस्त कर दिया था और आज उस शिक्षा जगत का नाम तक लोग भुल चुके हैं जो कभी पूरे विश्व में विख्यात था जिसमें दूर-दूर से विद्यार्थी नामांकन कराने के लिए सालों साल तैयारियां करते थे जिसकी प्रधानाध्यापक को पूरी दुनिया पुजती थी और जिसका किताब 3 महीने तक जलता रहा था  |

 अरे क्यों नहीं खंजर चुभेगा सीने में जिस राज्य में छोटी-छोटी बातों पर राजनीतिक हो जाए और इतनी बड़ी बातों पर कभी ध्यान ही नहीं गया हो |

 अरे क्यों नहीं खंजर चलेगा सीने पर जहा के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं उस गांव का नाम किसी ऐसे हंकारी के नाम पर जिसने बिहार के शिक्षा जगत को अर्श से फर्श पर ला दिया हो |

 कुछ समझ में आई चाहे  ना पर इतना तो समझ आता है उस इंसान के नाम पर उस गांव का नाम तो नहीं रखना चाहिए जो कभी उसी जगह को बर्बाद करने में अपना पूरा योगदान दिया हो |