ऐतिहासिक धरोहर संजोए पूरी संजीदगी से खड़ा है - अपना मुंगेर

ऐतिहासिक धरोहर संजोए पूरी संजीदगी से खड़ा है - अपना मुंगेर

 हमारा मुंगेर देश के पौराणिक शहरों में एक है। महाभारत काल का मोदगिरी आज मुंगेर के नाम से जाना जाता है। मुंगेर से कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं भी जुड़ी है। 1934 के विनाशकारी भूकंप में मुंगेर लगभग जमींदोज हो चुका था। आज वही मुंगेर फिर से अपनी विरासत को संजोए पूरी संजीदगी से खड़ा है। मुंगेर बंगाल के अंतिम नवाब मीरकासिम की राजधानी भी थी। यहीं पर मीरकासिम ने गंगा नदी के किनारे एक भव्य किले का निर्माण कराया था। यह किला 1934 में आए भीषण भूकंप से क्षतिग्रस्त हो गया था। लेकिन इसका अवशेष अभी भी शेष है। इस किले के संबंध में कहा जाता है कि यह महाभारत काल का ही है।

मीरकासिम का किला - मुंगेर का किला ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। बंगाल के अंतिम नवाब मीरकासिम का प्रसिद्ध किला यहीं पर स्थित है। यह किला गंगा नदी के किनारे बना हुआ है। नदी इस किले को पश्चिम और आंशिक रूप से उत्तर दिशा से सुरक्षित करता है। इस किला में चार द्वार है। इसमें उत्तरी द्वार को लाल दरवाजा के नाम से जाना जाता है। यह विशाल दरवाजा नक्काशीदार पत्थरों से हिन्दू और बौद्ध शैली में बना हुआ है। किले में स्थित गुप्त सुरंग पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। 1934 में आए भीषण भूकंप से इस सुरंग को काफी क्षति पहुंचा  था |

पीर नफाशाह का मजार : पीर शाह नफा का गुंबद किला के दक्षिणी द्वार के सामने एक टीले पर स्थित है। इस गुंबद में एक बड़ा सा प्रार्थना कक्ष है जिससे एक कमरा भी जुड़ा हुआ है। गुंबद के अंदर नक्काशी किया हुआ। यह गुंबद ¨हदू और मुस्लिम दोनों संप्रदायों के लिए समान रूप से पूज्यनीय है।

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शाहशूजा का महल - शाहशूजा का महल मुंगेर के खूबसूरत स्थानों में से एक है। आजकल इसको एक जेल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। महल के बाहर एक बड़ा सा कुंआ है जो एक गेट के माध्यम से गंगा नदी से जुड़ा हुआ है। हालांकि अब इसको ढक दिया गया है।

 प्राकृतिक स्थल :

सीताकुंड - सीता कुंड मुंगेर आनेवाले पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। कहा जाता है कि जब राम सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाकर लाए थे तो उनको अपनी पवित्रता साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी। धर्मशास्त्रों के अनुसार अग्नि परीक्षा के बाद सीता माता ने जिस कुंड में स्नान किया था यह वही कुंड है।
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ऋषिकुंड - खड़गपुर की पहाड़ियों में स्थित यह तीर्थस्थल काफी मशहूर है। इस स्थान का नाम प्रसिद्ध ऋषि श्रृंगी के नाम पर रखा गया है। यहां मलमास के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। पर्यटकों के बीच यहां के गर्मजल का झरना आकर्षण का केंद्र रहता है। इसमें स्नान करने के लिए दूर दराज से पर्यटक आते हैं। यहीं भगवान शिव को समर्पित एक बहुत प्राचीन मंदिर है जो भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय है।