अब भारतीय सीमा में नहीं होगी आतंकियों की घुसपैठ, भारत ने की है ये खास तैयारी

अब भारतीय सीमा में नहीं होगी आतंकियों की घुसपैठ, भारत ने की है ये खास तैयारी

भारत-पाकिस्तान सीमा पर घुसपैठ पर लगाम लगाने के लिए पुरानी बाड़ की जगह नयी बाड़ लगाने का काम जारी है. यह बाड़ ऐसी होगी, जिसे आतंकी काट नहीं पायेंगे और न ही इसपर जंग लग पायेगा. एक किमी में इस बाड़ को लगाने की लागत लगभग चार करोड़ रुपये हैं. गृह मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि पंजाब के अमृतसर में 7.18 किमी लंबे एंटी कट फेंसिंग बाड़ लगाने का पायलट प्रोजेक्ट मार्च 2020 में पूरा हो चुका है. इसे लगाने पर 14.30 करोड़ का खर्च आया है.


कई खूबियां हैं एंटी कट फेंसिंग की

स्टील से बनी हुई है एंटी कट फेंसिंग की बाड़

दो तारों के बीच पांच मिमी से कम की जगह

बाड़ पर कोई औजार नहीं कर पायेगा काम

तार इतनी मजबूत है कि इसे काटना आसान नहीं


वर्ष 2019 में गृह मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी. जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में जहां पर कमजोर फेंसिंग लगी हैं, वहां एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गयी है. पिछले साल केंद्र ने दो पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत करीब 71 किमी की दूरी कवर किया है, जिसमें 10 किमी क्षेत्र भारत-पाक सीमा और 61 किमी क्षेत्र भारत-बांग्लादेश सीमा का कवर किया गया है. अब इसे पाकिस्तान के साथ लगती 3,323 किमी और बांग्लादेश से लगती 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई चरणों में पुराने बाड़ को हटा कर एंटी कट फेंसिग की जायेगी.

बता दें कि अभी सीमा के अधिकांश हिस्से में जो कंटीली तार लगी है, उसे घुसपैठिये आसानी से काट देते हैं. पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगी सीमा पर ऐसी ही तार लगी है. सरकार की प्राथमिकता फिलहाल पंजाब और कश्मीर से लगे पाकिस्तान की 1,900 किमी लंबी सीमा पर एंटी कट फेंसिंग करना है. ताकि घुसपैठ को पूरी तरह रोका जा सके.

स्मार्ट फेंसिंग पर भी चल रहा काम, ली जा रही इस्राइली तकनीक की मदद: सीमा पर घुसपैठियों को रोकने के लिए एंटी कट फेंसिंग के अलावा स्मार्ट फेंसिंग पर भी काम किया जा रहा है. इसके लिए इस्राइली तकनीक की मदद ली जा रही है. बता दें कि पाकिस्तान और बांग्लादेश की कई सीमा ऐसी है, जहां बाड़ बंदी संभव नहीं है. इसलिए सीआइबीएमएस सिस्टम, इंटरसेप्शन टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है. इसका ट्रायल भी सफल रहा है और अगले पांच साल में इसे लगा दिया जायेगा. नदियों और नालों में सेंसर लगाये जायेंगे.