भारत में पहली बार: आज ही लागू हुआ था EPF कानून, हुए कई बदलाव

भारत में पहली बार: आज ही लागू हुआ था EPF कानून, हुए कई बदलाव

देश में वेतनभोगियों के बीच सबसे लोकप्रिय निवेश कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) है. सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाली ये योजना कर्मचारियों के बीमा और पेंशन जैसी सुविधाओं पर ध्यान देती है. पहले कर्मचारियों के लिए न तो ये योजना थी और न ही सुरक्षित भविष्य की खास उम्मीद. साल 1952 के 23 फरवरी को देश में कर्मचारी भविष्य निधि कानून लागू हुआ, जिसके बाद काफी सारे बदलाव आए.

ईपीएफओ होता क्या है?

ईपीएफओ यानी ‘कर्मचारी भविष्य निधि संगठन’ भारत सरकार का एक संगठन है, जो अपने सदस्यों को रिटायरमेंट के बाद आय सुरक्षा देने के लिए कई योजनाएं चलाता है. हर उस कंपनी को ईपीएफओ में खुद को रजिस्टर्ड कराना होता है, जहां कर्मचारियों की संख्या 20 से अधिक हो. इसके बाद नियोक्ता एवं कर्मचारी दोनों के द्वारा वेतन का 12 प्रतिशत भविष्य निधि में जमा किया जाता है, जो कर्मचारी के आवेदन पर या सेवानिवृति पर मिलता है.

कुछ विशेष हालातों में जैसे घर बनवाने पर, या शादी या फिर उच्च शिक्षा पाने के लिए पैसों की जरूरत पर आंशिक तौर पर इससे राशि निकाली जा सकती है. लंबे समय तक भविष्य निधि के रूप में धन की बचत की जाए तो यह कर्मचारी के लिए भविष्य में काफी फायदेमंद होती है. इसके अलावा नौकरी छोड़ने के बाद दो महीनों तक बेरोजगार रहने की स्थिति में भी इस राशि पर क्लेम किया जा सकता है. हालांकि ये विकल्प काफी कम ही लोग अपनाते हैं. इस निवेश को लंबी अवधि के इनवेस्टमेंट की तरह देखा जाता है इसलिए इसका उपयोग तभी करना चाहिए जब पैसे निकालना आखिरी विकल्प हो.