भारत-चीन की बातचीत को एक साल हुआ पूरा लेकिन अभी तक नहीं सुलझा विवाद

भारत और चीन के बीच डिप्लोमैटिक चैनल के साथ ही सैन्य कमांडर स्तर पर बातचीत पिछले एक साल से जारी है. दोनों देशों ने ठीक एक साल पहले पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को हल करने के लिए बातचीत शुरू की थी. इस बीच दोनों देशो के सैन्य अधिकारियों के बीच कई दौर की बैठके हुईं है, लेकिन अभी तक विवाद नहीं सुलझा है. दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में LAC पर डिसइंगेजमेंट से संबंधित बचे हुए मुद्दों के समाधान के लिए लंबी बातचीत की थी. इन बैठकों में दोनों देश बॉर्डर पर शांति बनाए रखने पर सहमत हुए थे.

भारतीय सेना और PLA के बीच विवादित सीमा पर तनाव कम करने के लिए 6 जून 2020 से अभी तक 11 राउंड की बातचीत हो चुकी है. विवाद अन्य घर्षण बिंदुओं पर अब भी फंसा हुआ है. हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और डेपसांग को लेकर हल निकालने के लिए बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई है. बातचीत जारी है लेकिन, गतिरोध खत्म होने के आसार नहीं हैं. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अधिकारी ने कहा कि वह फ्रिक्शन पॉइंट्स पर हल निकालने के लिए चीनी पक्ष को बातचीत में शामिल करना जारी रखेंगे. दोनों सेनाओं के पास लद्दाख थिएटर में 50 से 60 हजार सैनिक हैं और पैंगोंग त्सो सेक्टर में विवाद के बाद तैनाती कम नहीं हुई है.

हाई अलर्ट पर भारतीय सेना
28 मई को सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवने ने कहा था कि उनके सैनिक हाई अलर्ट पर हैं, क्योंकि पीएलए ने अपने सैनिकों और टैंकों को एलएसी पार डेप्थ एरिया में तैनात करना जारी रखा है. जहां से उन्हें कम समय में आगे के क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता था. उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा (सेवानिवृत्त) ने कहा कि कोर कमांडरों की बैठकों के मिले-जुले परिणाम रहे हैं, क्योंकि वे पैंगोंग त्सो क्षेत्र में डिसइंगेजमेंट पर बातचीत करने में सफल रही थी, लेकिन आगे कोई प्रगति नहीं हुई है.