फुकुशिमा: प्रदूषित पानी समुंद्र में डालने की दी मंजूरी जापान।

2011 की सुनामी में बर्बाद हुए फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से 10 लाख टन से ज्यादा प्रदूषित पानी को समुंद्र में छोड़ने की मंजूरी जापान ने दे दी है। प्लान यह है की उस पानी को समुंद्र में डालने से पहले पानी को साफ किया जाएगा ताकि पानी का रेडिएशन का स्तर पीने के पानी से भी कम हो जाए।

जापान ने बताया की परमाणु ईंधन को ठंडा करने के लिए इस्तेमाल किया जाया जाता है इस पानी को समुंद्र में छोड़ने का कार्य लगभग 2 साल में शुरू कर दिया जाएगा। जबकि वहा के स्थानीय मछुआरे ने इस फैसले का खूब विरोध कर रहे हैं दक्षिण कोरिया और चीन की तरह।

फुकुशिमा पॉवर प्लांट के परमाणु रिएक्टर की इमारत 2011 में आए सुनामी के बाद हाइड्रोजन विस्फोट में तबाह हो गई थी। इस योजना के मंजूर होम से पहले भी इसपर काफी हद तक मशकत करनी पड़ी है। उम्मीद है इस योजना को पूरा होने में काफी दशक लग सकते हैं।

10लाख टन पानी का उपयोग किया गया था जब सुनामी में इस रिएक्टरो की कूलिंग सिस्टम तबाह कर दी थी जिसके कारण तीन रिएक्टर पिघल गय थे और इस रिएक्टर को ठंडा करने के लिए लाखो टन पानी का इस्तेमाल किया गया था।

फुकुशिमा हादसे को करीबन 10साल बीत चुके हैं। अभी रेडियोएक्टिव पानी की सफाई एक जटिल प्रक्रिया द्वारा किया जाता है उसके बाद पानी से रेडियोएक्टिव तत्व है जाते है परंतु कुछ फिर भी इसमें रह जाते हैं जिसमे ट्रीटरीम भी शामिल है जो की इंसानों के लिए बहुत  अधिक मात्रा में हानिकारक होती है साफई के बाद पानी को टैंको में भरा जाता है और लेकिन इस प्लांट का संचलन करने वाली कंपनी ( टेपको ) के पास रखने के लिए जगह की कमी है जबकि मजूद टैंको को भरने में 2022 तक भरा जा सकता है।

Virodh- फैसले का विरोध ग्रीनपिस एनजीओ ने इस फैसले का विरोध काफी लंबे समय से किया है एक एनजीओ का कहना है की जापान के इस फैसले से फुकुशिमा के लोग एकबार फिर से विफल हो चुके है। वही देश का मछली उद्योग भी इस फैसले के विरोध हैं। 2011 में इस उद्योग को काफी नुकसान सहना पड़ा था। और उस समय कई देशों ने जापान के उतर -पूर्वी तट से सी- फूड के आयात पर रोक भी लगा दी थी। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने कहा की जापान के इस फैसले से उनको काफी दुख हुआ और चीन के झालो लिजियन्न ने जापान को अपने अपने काम जिमेदारी से करने को कहा। हालाकि अमेरिका ने जापान के इस फैसले में हामी भरी है।

हुआ क्या था- 2011 में जापान उतर- पूर्वी तट पर 9.0 की त्रिवता से भूकंप आया था। उसी के कुछ छन बाद वहा 15 मीटर ऊंची सुनामी आई थी । जिसमे भूकंप में फुकुशिमा परमाणु संयंत्र का बैक- अप सिस्टम तो बच गया था । लेकिन सुनामी में सब तहस- नहस हो गया था। इसके कारण रिएक्टरों के पिघलने से कई टन रेडियोएक्टिव सामग्री बाहर आ गई ।