भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सेना की चयन प्रक्रिया में जताई भ्रष्टाचार की आशंका, इसकी जांच करेगी CBI

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सेना की चयन प्रक्रिया में जताई भ्रष्टाचार की आशंका, इसकी जांच करेगी CBI

भारतीय सेना की खुफिया एजेंसियों द्वारा एक ऑपरेशन के आधार पर बड़ी बात कही जा रही है।  सेना में चयन प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार किए जाने की आशंका जताई गई है। जांच के दायरे में कई एजेंसियां शामिल हैं, इसलिए भारतीय सेना ने इस मामले को सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है।

दरअसल, भारतीय सेना की खुफिया एजेंसियों ने एक गुप्त ऑपरेशन के आधार पर सेना में भर्ती के लिए आयोजित की जाने प्रवेश परीक्षाओं को लेकर सेंटरों पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। ऐसे में सेना की तरफ से बयान आया है कि इस मामले में वह किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को नजरअंदाज नहीं करेगी।

बता दें कि सेना में भर्ती के लिए 28 फरवरी को होने वाले कॉमन एंट्रेस एग्जाम के पेपर लीक हो गए थे। इस बात की जानकारी सबसे पहले आर्मी इंटेलिजेंस को मिली , जिसके बाद 27 फरवरी को पूरी परीक्षा रद्द कर कर दी गई थी। गौरतलब है कि 28 फरवरी को पूरे देश में छह जोन के 40 सेंटर पर यह परीक्षा होनी थी, जिसमें 30,000 उम्मीदवार शामिल होने वाले थे। इस मामले में दो मेजर समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इस मामले में पुणे पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता ने बताया था आरोपी चार से पांच लाख में प्रश्न पत्र बेच देते थे। पेपर लीक की भनक लगते ही आर्मी इंटेलिजेंसी और पुणे पुलिस ने मिलकर जॉइंट ऑपरेशन किया और महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में छापोमारी के दौरान सात लोगों धर-दबोचा।

पकड़े गए चार आरोपियों की पहचान किशोर महादेव गिरी, माधव शेषराव गीते, गोपाल युवराज कोली, उदय दत्तू अवी, अख्तर खान, आजाद खान और महेंद्र सोनावणे के रूप में हुई है। इनमें से उदय दत्तू अवी और गोपाल युवराज कोली दोनों आर्मी के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में काम कर चुके हैं। इसके अलावा किशोर महादेव गिरी और माधव शेषराव गीते सेना में भर्ती के लिए कोचिंग क्लास चलाते थे।