पसंद की नौकरी मिले तो बहुत अच्छी बात है लेकिन ना मिले तो हमें निराश न हों

पसंद की नौकरी मिले तो बहुत अच्छी बात है लेकिन ना मिले तो और भी अच्छी बात है इस बात से मैं निराश नहीं होना चाहिए आप अकेले नहीं है जिसे पसंद की नौकरी नहीं मिली इसमें रतन टाटा भी शामिल है

पसंद की नौकरी मिले तो बहुत अच्छी बात है लेकिन ना मिले तो हमें निराश न हों

कहां जाता है मन का हो तो अच्छा और मन के मुताबिक ना हो तो और भी अच्छा । दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें अपने पसंद की नौकरी नहीं मिलती है। इनमें जमशेदपुर के रतन टाटा भी शामिल है। टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा को अपने पसंद की नौकरी नहीं मिली । हम सभी अपने जॉब को लेकर कुछ ना कुछ सपने देखते हैं। वैसे ही रतन टाटा ने भी अपने ड्रीम जॉब को लेकर एक सपना देखा था।

रतन टाटा बताते हैं कि 1959 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे आर्किटेक्चर बनना चाहते थे । वह हमेशा से ही आर्किटेक्चर बनना चाहते थे , क्योंकि उनको इसमें काफी रूचि थी। लेकिन अपने माता पिता के कहने पर उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म करने के बाद वे टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में इंटर्नशिप करने आए। उन्हें इस बात का बिल्कुल अफसोस नहीं है कि वे अपना ड्रीम जॉब नहीं कर पाए। 

 इच्छा सब करते हैं लेकिन केवल कुछ ही लोग के सपने पूरे होते पाते हैं । इस बात से हमें निराश नहीं होना चाहिए और यह सोचकर रुकना भी नहीं चाहिए। जिस राह पर जिंदगी आगे बढ़ाती है उस राह पर आगे बढ़ना चाहिए।