झारखण्ड की परवासी बेटियां लौटी घर तमिलनाडु में 6 महीने से थी फसी

झारखण्ड की परवासी बेटियां लौटी घर तमिलनाडु में 6 महीने से थी फसी

धनबाद एलेप्पी स्पेशल ट्रेन से गुरुवार को अहले सुबह तमिलनाडू से आठ लड़कियों को रांची लाया गया। ये लड़कियां पिछले दिसंबर माह से कोयम्बटूर अवनाशी स्थित कपड़ा मिल में काम कर रही थीं। इन्हें श्रम विभाग और फिया फाउंडेशन के सहयोग से रांची लाया गया। इन लड़कियों को कौशल विकास के नाम पर बिना ट्रेनिंग के 15 हजार मासिक वेतन देने की बात कहकर ले जाया गया था। परंतु सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक काम करने के एवज में उन्हें मात्र पांच से छह हजार रुपये दिए जा रहे थे। 

जब लॉक डाउन की स्थिति हो गई और दो माह से काम बंद हो गया, तो लड़कियों ने झारखंड लौटने की इच्छा जाहिर की। पर एनी सोर्स नामक कंपनी से जुड़ी हिमा नामक महिला इन्हें आने नहीं दे रही थी। इस पर लड़कियों से गुमला में अपने परिचित को फोन किया। इसके बाद प्रवासी कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। बाद में झारखंड से कंपनी को पत्र भेजा गया और सभी लड़कियों को वापस झारखंड भेजने को कहा गया।

 झारखंड आने वाली सिसई की 35 वर्षीय बंसती कुमारी हाउस कीपिंग करती थी। अन्य सभी युवतियां सिलाई का काम करती थीं। इनमें गुमला की 19 वर्षीय माला कुमारी, 20 वर्षीय सीता कुमारी, 18 वर्षीय सीता कुमारी व 20 वर्षीय मरियम विलुंग, 19 वर्षीय सीता कुमारी शामिल हैं। इसके अलावा बेड़ों की 20 वर्षीय सिमरन उरांव, 18 वर्षीय रायडीह की संतोषी कुमारी शामिल हैं।

इन्हें प्रवासियों को लेने आए वाहन से उनके गांव भेजा गया। इन युवतियों को लेने के लिए रांची स्टेशन कंट्रोल रूम की काउंसलर रंजनी तांबे आई थीं। उन्होंने जानकारी दी कि इन लड़कियों से सात जून से बातचीत हो रही थी। हमलोगों ने संबंधित कंपनी से कागजी प्रक्रिया की। इसके बाद उन्हें आने दिया गया।