महारानी जिन्द कौर के बचपन की कहानी

यह कहानी चित्रा बनर्जी दिवकरूनी की किताब से ली गयी है।इस कहानी में महारानी के बचपन में अपने भाई के साथ कि गयी शैतानी का वर्णन किया गया है।

महारानी जिन्द कौर के बचपन की कहानी
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भारत का चित्र सदियो से एक पुरुष प्रधान समाज के रूप में बना हुआ है जो आज तक कहीं गलत नहीं है मगर इसी भारत देश में कई ऐसी स्त्रियों ने भी जन्म लिया जिनके हौसले,निश्चय और ताकत के आगे बड़े-बड़े धुरंदर भी धूल फाकने पर मज़बूर हो गए,उदाहरण के तौर पर रानी लक्ष्मी बाई को ही देख लीजिए कैसे उन्होंने अपने राज्यवासी और उनके हक्क के वास्ते अपनी अंतिम सांस तक अंग्रेज़ों से लड़ कर अपना नाम इतिहास के पन्नो में अमर कर दिया।

 आज हम इसी श्रेणी की एक वीरांगना महारानी जिन्द कौर के संदर्भ में बात करेंगे।जिन्द कौर महाराजा रणजीत सिंह की सबसे प्रिय और सबसे कम उम्र की पत्नी थीं।बेहद ख़ूबसूरत और अपनी समझ-भुझ के लिए प्रसिद्ध थी रानी जिन्द कौर।जिन्द कौर का जन्म 1817 में मन्ना सिंह औलख के घर हुआ था जो कि महाराजा रणजीत सिंह के शाही कुत्तों को प्रशिक्षण दिया करते थे।महाराजा के गुज़र जाने के बाद और उनके वंसजो की हत्या हो जाने के महाराजा के सबसे छोटे पुत्र दुलीप सिंह को महज़ पांच साल की उम्र में राजा बनाया गया।दुलीप सिंह रानी जिन्द कौर के पुत्र थे,अपने पुत्र की कम उम्र को देखते हुए उन्होंने शाशन का भार अपने ऊपर ले लिया और 1843-46 तक शाशन चलाया।

आज रानी जिन्द कौर के बचपन की एक कहानी को आपके साथ साझा करूँगा।

चित्रा बनर्जी दिवकरूनी अपने द्वारा लिखी गई रानी जिन्द कौर की जीवनी में बताती हैं।

बात है एक सुबह की जब जिन्द कौर अपनी माँ और बहन के साथ एक चारपाई पर सो रही थी साथ ही बगल की चारपाई पे उनके भाई जवाहर सो रहे थे।सुबह-सुबह दबे पांव चलने की आवाज़ से जिन्द की नींद खुल चुकी थी,वो आवाज़ और किसी की नही बल्कि जवाहर की थी जो सुबह-सुबह अमरूद को खेत को जा रहा था।अपने बड़े भाई को देख चंचल जिन्द के मन में उसके पीछे जाने का विचार आया और वे निकल पड़ी।जिन्द ने काफी दूर तक अपने भाई का पीछा किया जिसके बाद वो काफी थक गई और हांफने लगी जिसकी आवाज़ सुन उनके भाई ने तुरंत उन्हें घर लौटने को कहा जिसका खंडन करते हुए जिन्द ने अपने भाई के साथ रहने की जिद्द की फिर क्या जवाहर अपनी प्यारी बहन की बात को नकार नही सका और वे दोनों अमरूद तोड़ने में लग गए ,जवाहर अमरूद तोड़ता और अपनी बहन को झोली में रखने को देता,कुछ देर में झोली भर गई और वे वापस लौटने ही वाले थे कि वहाँ हरि पगड़ी पहने किसान आ गया।यह देख दोनों हड़बड़ा गए जहां जवाहर बच निकलने का रास्ता खोजने लगा वही नौ वर्ष की जिन्द डर के मारे कुछ कर ही नही पा रही थी।जवाहर ने उसे बाहर जाने के लिए तरीका बताया मगर डर के मारे उसके कदम जैसे थम से गये थे।परिस्थिति देखते हुए बड़े भाई ने किसान का ध्यान बटाया और बहन दूसरे रास्ते से अमरूद ले कर भाग निकली।दोनी में समझौता हो चुका था कि अमरूद की थैली कुए के पास रखनी है छिपा कर।जिन्द घर पहुँची पर अपने बड़े भाई को घर में ना पाकर काफी चिंतित हो गयी,कुछ देर बाद वो किसान जवाहर को लेकर घर आया,जवाहर के चेहरे पे चोट का निशान था।अपने भाई की ऐसी स्तिथि देख जिन्द काफी गुस्सा हो गयी।किसान ने उनकी माँ को जवाहर के द्वारा किये गए कार्य के बारे में बताया और धमकी दी कि अगली बार ऐसी घटना होने पर वो जवाहर को पंचायत ले जाएगा फिर उसने जवाहर को धक्का देखे इस तरह छोरा की वो गिर गया फिर क्या था जिन्द ने अपने पूरे बल से उस किसान पर हामला कर दिया।परिणाम स्वरूप माँ द्वारा दोनों भाई बहन की पिटाई हुई।दोनों फिर भी काफी खुश थे एक क्योंकि उसकी बहन ने उसका बदला ले लिया और दूसरे ने क्योंकि अब उसका भाई उसे मीठे अमरूद खिलाएगा।