Junoon E04: भारत का वो स्मार्ट गांव जिसे देखने विदेश से आते हैं मेहमान

भारत का वो स्मार्ट गांव जिसे देखने विदेशों से आते हैं मेहमान, जानिए ऐसा क्या है यहां।
अगर हम आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में बताएं जो ना केवल अपने लोगों के लिए बिजली का उत्पादन तो कर ही रहा है ,साथ ही साथ सरकार को बिजली बेच भी रहा है। योगा भारत का एक आदर्श गांव बन गया है और पिछले एक दशक से जिसने अपनी स्थिति कायम रखी है। आइए आपको आज इस गांव के बारे में बताते हैं और यह भी बताते हैं कि कैसे यह गांव आगे बढ़ रहा है। 


यह गांव है तमिलनाडु के कोयमबदु जिले के मेट्टूपलायम तालुक में आने वाला गांव ओडानथुराइ। गांव की पंचायत की वजह से यहां पर पिछले एक दशक से ज्यादा समय से बिजली का उत्पादन हो रहा है । साथ ही साथ पंचायत की तरफ से तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को भी बिजली बेच रहा है। ओडानथुराइ के पास अपनी खुद की एक विंड मिल है जो 350 किलोवाट की क्षमता से बिजली का उत्पादन करती है। 


साल 2005 में इस ओडानथुराइ के करीब 1.55 करोड़ रुपए की लगत से सेटअप किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि अब तक यह गांव करीब दो लाख यूनिट बिजली भेज चुका है। जबकि राज्य में उत्पादन 6.75 लाख यूनिट का है। 1 वर्ष में बिजली बेचकर गांव के हिस्से हर साल करीब 2000000 रुपए आ रहे हैं । इस समय यहां पर करीब 4.75 यूनिटस है। 


विंडमिल के लिए पंचायत ने अपनी बचत में से 4000000 रुपए दिए थे । बाकी बचे हुए पैसों के लिए पंचायत ने 1.15 करोड़ का लोन लिया था। यह लोन साल 2005 में एक राष्ट्रीय बैंक से लिया गया था। पंचायत की तरफ से इस कर्ज की अदायगी स्टेट बोर्ड को बिजली बेचने से मिले पैसों से की गई पिछले वर्ष पंचायत की तरफ से लोन की पूरी रकम चुका दी गई है । पंचायत के विकास के लिए और शनमुगम को श्रेय दिया जाता है। वह पंचायत के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि लोन पर कैपिटल और ब्याज के बाद इनकी रकम करीब 1.84 करोड़ रुपए पहुंच गई थी। इस गांव को बिजली बचाने की वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक में सहारा गया है।


पंचायत ने सिर्फ बिजली उत्पादन पर काम नहीं किया। राज्य सरकार की ग्रीन हाउस स्कीम के तहत यहां पर अब तक 850 घरों का निर्माण भी कराया जा चुका है यह घर उनके महिलाओं को भी शॉप पर जा चुके हैं। यह आंकड़ा राज्य में सबसे ज्यादा है। शनमुगम एक निर्दलीय उम्मीदवार थे मगर वह बाद में एआईएडीएमके से जुड़ गए थे।  साल 1996 से 2006 तक हर बार गांव की जनता ने उन्हें चुना था।  वह सिर्फ दसवीं पास है और इससे लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ा। 


पंचायत की सीट साल 2006 में सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई और इसके बाद उनकी पत्नी एस लिंगामाला ने चुनाव लड़ा। साल 2016 तक इस पद पर रहीं।  हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि पत्नी के जीतने के बाद भी शुनमुगम ने गांव के डेवलपमेंट में बड़ी भूमिका अदा  की थी। जनवरी 2020 में हुई पंचायत चुनाव में बस 53 वोटों के अंतर से वह हार गए। तमिलनाडु का यह वह गांव है जिसे देखने विदेश से लोग आते हैं । इसके अलावा कॉलेज के प्रोफेसर और कई आईएएफ ऑफिसर्स भी गांव को देखने आते हैं।