Junoon: 6 महीने में 300 गांव 500 मंदिर और 26000 किलोमीटर की यात्रा वह भी अपनी कार से

6 महीने में 300 गांव 500 मंदिर और 26000 किलोमीटर की यात्रा वह भी अपनी कार से।

अपनी 26000 किलोमीटर की भारत यात्रा के बारे में बात करते हुए तरुण कहते हैं आज हमारी यात्रा को खत्म हुए तकरीबन एक महीना गुजर गया है लेकिन एक दिन भी ऐसा नहीं है नहीं  बीतता  जब परिवार में हमारी इस यात्रा से जुड़ी बातें नहीं होती है। 
तरुण फिलहाल कोविड मरीजों के लिए स्वयं सेवी के तौर पर काम कर रहे हैं लेकिन अपनी यात्रा के बारे में  बात करते हुए वह काफी उत्साह से बताते हैं , ऐसे  हालातों में भी जब मैं अपनी आंखें बंद करता हूं तो मैं खुद को तमिलनाडु के किसी मंदिर में बैठा हुआ पाता हूं। 

दिल्ली में रहने वाले 36 वैष्णो तरुण कुमार बंसल एक व्यापारी है वह अपनी पत्नी सुनैना और दो बेटियों त्रिजा और शुभदास्तु   के साथ , 50 देशों की यात्रा कर चुके हैं। लेकिन उनके मन में हमेशा भारत के अनदेखी हिस्सों में घूमने की चाह है। उनकी पत्नी भी मंदिरों और पौराणिक कथाओं में काफी दिलचस्पी रखते हैं। 

तरुण बताते हैं, हम 3 अक्टूबर को मात्र 3 हफ्तों की छुट्टियों के लिए राजस्थान गए थे। हमने अपनी यात्रा राजस्थान के एक गांव से शुरू की थी। हमने जैसलमेर के कई छोटे-बड़े मंदिरों के इतिहास के बारे में जाना। वह कहते हैं , ये सारी  जानकारियां मुझे काफी रोचक लगी। साथ ही गांवों के लोगों का हमारे प्रति व्यवहार, मेरे दिल को छू गया। तभी हमने अपनी इस यात्रा को और आगे बढ़ाने का फैसला किया। वह कहते हैं , कि भारत के ग्रामीण इलाके वाकई बहुत खूबसूरत है । अगर इन्हें पर्यटकों के नजरिए से विकसित किया जाए तो वहां के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार जरूर आएगा। 

अपनी 6 महीने की कार यात्रा, में वे 300 से अधिक गांवों में घूमे। वहीं उन्होंने देश भर के 500 से ज्यादा मंदिरों के दर्शन किए । उन्होंने राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक ,तमिलनाडु, केरल ,मध्य प्रदेश सहित 15 राज्यों की यात्रा की। 

तरुण बताते हैं , हमने अपनी यात्रा से पहले काफी रिसर्च की थी।  हमने भगवान राम के वनवास रूट को फॉलो किया। हालांकि, हम उन सारी जगहों  पर नहीं जा सके। जहां -  जहां राम जी गए थे । उन्होंने अपनी यात्रा के सात हफ्ते तमिलनाडु और केरल में बिताएं। वह बताते हैं, हमने तमिलनाडु स्थित  दिव्य देशम  के भी दर्शन किए।  दिव्य देशम भगवान विष्णु के 108 मंदिर है । जिसमें से 105  मंदिर भारत के विभिन्न राज्यों में स्थित है । तमिलनाडु में दिव्य देशम के 84  मंदिर है। हमने उन सभी  84 मंदिरों के दर्शन किए और उनका इतिहास भी जाना। तरुण इससे अपनी एक उपलब्धि के रूप में देखते हैं।

वह  कहते हैं , मुझे यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों ने और यहां तक कि मंदिर के पुजारी ने भी दिव्य देशम  को और गहराई से जानने में मदद की। उन्होंने दक्षिण भारत के प्रख्यात मुरूगन मंदिरों के साथ-साथ मदुरई के मीनाक्षी मंदिर के भी दर्शन किए। 
तरुण अपने दक्षिण भारत दौरे के बारे में बात करते हुए कहते हैं, पहले मैं वहां की भाषा को लेकर थोड़ा डरा हुआ था। लेकिन भाषा का ज्ञान ना होते हुए भी वहां के लोग ने हमारी बहुत मदद की जिसके साथ ही उन्होंने तेलंगाना के वेमुलवाडा  के प्रसिद्ध मंदिर के भी दर्शन किए। 

तरुण बताते हैं कि जब उनकी बड़ी बेटी मात्र 2 महीने की थी तब से वह परिवार के साथ ऐसी लंबी यात्रा करते आ रहे हैं। उन्होंने सबसे पहली बार 7000 किलोमीटर की यात्रा की थी उस यात्रा के दौरान उन्होंने भारत के सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए थे । वह बताते हैं पिछले साल बच्चों की स्कूलिंग ऑनलाइन चल रही थी वही मैं भी घर से ही काम कर रहा था।  लॉकडाउन के बाद जैसे ही जीवन सामान्य हुआ हमने इस यात्रा की योजना बनाई। 
उन्होंने बताया कि वह सुबह काफी जल्दी ही होटल  से निकलते थे ।  साथ ही उन्होंने अपने साथ एक इलेक्ट्रिक कुकर रखा था ।  जिसमें वह खिचड़ी दलिया और चावल जैसी कुछ चीजें सुबह  ही बनाकर रख   लेते थे। तरुण करते हैं , जब आप बच्चों के साथ यात्रा करते हैं , तो उनके खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना पड़ता है ।  इसलिए हमने खाना बनाने का सामान अपने साथ रखा था । हमारे दो बड़े बागों में राशन  और रसोई का सामान ही था। 
यात्रा के दौरान दोनों बच्चे अपनी ऑनलाइन क्लासेज भी अटेंड करते थे। तरुण ने बताया कि वह किसी सार्वजनिक जगह जैसे पार्क , मंदिर किसी होटल के पास रुकते थे ताकि नेटवर्क सही मिले और बच्चे क्लास भी अटेंड कर सके। इस बीच तरुण भी अपनी ऑफिस का काम करते थे। वहीं उनकी पत्नी यात्रा के दौरान दिनभर कहां कैसे व्यवस्था करनी है, उनकी  योजनाएं तैयार करती थी। 

तरुण बताते हैं,  कि इतने लंबे सफर में बच्चों का मनोरंजन करना भी बहुत जरूरी है। इसलिए वह यात्रा के दौरान बच्चों के साथ कई तरह के खेल खेलते थे । कभी वे बच्चों को पास से गुजरती  गाड़ियों को गिनने को कहते कभी उन्हें अपनी आंखें 7 मिनट तक बंद करने को कहते जो पहले  आँख खोलता वो  हार जाता।  
उन्हें कई लोगों ने कहा कि पत्नी और दो बेटियों के साथ इतनी लंबी यात्रा करना सुरक्षित नहीं है । लेकिन तरुण बताते हैं , यात्रा के दौरान हमें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा कभी हम में होटल मिलने में दिक्कत आई तो कभी भाषा ना आने के कारण कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा । लेकिन हमें कभी सुरक्षा से जुड़ी  कोई दिक्कत नहीं हुई। 

अगर आप कभी ऐसी किसी यात्रा की योजना बनाएं और आपको मदद की जरूरत हो तो आप तरुण बंसल से संपर्क कर सलाह ले सकते हैं।