Kahaniyan By Aditi Sinha: पाताललोक के हथोडा त्यागी से प्रेरित ने पूरे परिवार को मार डाला

करीबन दिन के 2 बजे अंकित, रौशन और आराध्या, अपनी 1 साल की बच्ची के साथ दीपक के घर पहुँची। आते हीं आराध्या रौशन के साथ बच्ची को लेकर बाथरूम चली गई। वापस लौटने पर किसी के चिल्लाने की आवाज़ सुनाई दी। आवाज़ सुनकर दोनो, रौशन और आराध्या काफी हैरत में आ गए। रौशन दौड़ते हुए कमरे की ओर भागता है। वो वहाँ जाते हीं सन्न हो जाता है। किसी तरह वो अपने साथ अंकित, आराध्या और बच्ची की जान बचते हुए, वहाँ से भाग निकलता है।
वो सभी वहाँ से भागकर टीएमएच (Tata Main Hospital) पहुचें। वहाँ पहुचने पर रौशन दीपक के साले, विनोद को फोन कर बताता है कि तुम्हारी बहन और उसकी बच्चियों के साथ कुछ गड़बड़ हुआ है। जा के पता करो।

आखिर ऐसा क्या देखा लिया था रौशन, और उसके साथ के लोगों ने जिसकी वजह से उन्हें वहाँ से भागना पड़ा? वहाँ ऐसा क्या हुआ कि वो लोग भाग कर सीधे अस्पताल पहुँचे? क्या गड़बड़ हुई थी विनोद की बहन और बच्चियों के साथ?  कौन था ये दीपक जिसके घर जाने पर ये सब हुआ?

आज कहानियाँ में कहानी ऐसे सनकी शख्स की जिसने चार-चार हत्याएँ कर दीं , घंटों शवों के साथ रहा, वो जो, पुलिस के हाथ आने पर बोला “जिसको मारना था वही बच गया"। और हत्या भी ऐसे की, की अगल-बगल किसी को भनक तक नही लगी।

तारीख 12 अप्रैल 2021, दिन सोमवार
दीपक अपने दोस्त, रौशन को फोन कर खाने पर घर बुलाता है।
दीपक, जमशेदपुर के तीस्ता रोड, कदमा थाना क्षेत्र के एक क्वाटर में रहता था। वो TELCO के FIRE SERVICE DEPARTMENT में काम करता था। उसके साथ उसकी पत्नी वीणा और दो बच्चियाँ, बेटी दिवया और श्रावणी रहते थें। 
दिन के तकरीबन 2बजे रौशन, रौशन के साथ उसकी की पत्नी आराध्या, इनकी 1 साल की बेटी और रौशन का साला अंकित भी दीपक के घर पहुँचता है।
आराध्या, रौशन के साथ बच्ची को लेकर बाथरूम चली जाती है। वापस आते वक्त जब दोनों ने चिल्लाने की आवाज सुनी। तो रौशन दौड़ता हुआ कमरे में आया। वहाँ आते हीं वो देखता है कि दीपक, अंकित पर हथौड़े द्वारा बेरहम तरीके से हमले किये जा रहा है। रौशन बचाने गया तो दीपक ने उसपे भी हमलें कियें। किसी तरह रौशन ने अंकित, अपनी पत्नी और बच्ची को वहाँ से निकालने में कामयाब होता है। वहाँ से वो लोग भाग कर टीएमएच अस्पताल पहुँचते हैं। रौशन और अंकित वहाँ भर्ती होते हैं जिसमे अंकित की हालत बेहद गंभीर थी। रौशन ने दीपक के साले यानी विणा के भाई विनोद को फोन कर उससे बोला कि- तुम्हारी बहन और उसकी बच्चियों के साथ कुछ गड़बड़ हुआ है, जा के पता करो। तब दीपक के ससुराल से यानी विणा के मायके से कुछ लोग वहाँ पहुचते हैं जिनमे विणा का भाई विनोद भी होता है। वहाँ पे कोई और भी पहुँचता है जो उनकी तरह हीं बेचैन और घबराया हुआ था, एक और भाई जो अपनी बहन रिंकी घोष को ढूंढ रहा था। रिंकी सुबह 11 बजे घर से निकली थी, और दीपक की बच्चियों को ट्यूशन पढ़ाने आई थी। पर दिन के 4 बज गए थे और रिंकी घर नही पहुँची तब उसका भाई उसे ढूंढता हुआ दीपक के घर पहुँचा। उनलोगों ने देखा घर के बाहर ताला लटका हुआ है। रिंकी का भाई हैरान हो जाता है। रिंकी अगर दीपक के घर होती तो उसकी स्कूटी घर के बाहर पार्क की हुई होती क्योंकि वो हमेशा स्कूटी को बाहर हीं पार्क करती थी। लेकिन स्कूटी घर के बाहर नही थी। तो आखिर रिंकी किधर गई। उधर विणा के घर वाले सोच में पड़े थे कि घर मे ताला क्यों बंद। विणा के परिवार वाले ताला तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इधर रिंकी का भाई  बहुत परेशान हो रहा था कि वो रिंकी को किधर ढूँढे। तभी उसकी नज़र घर के अंदर गई उसने देखा एक गाड़ी रखी है जो एक स्कूटी थी। गौर से देखने पर उसे पता चलता है कि वो रिंकी की हीं स्कूटी है जिसे ढक के छुपाने की कोशिश की गई है।

ताला टूटते हीं विनोद और कुछ लोग अंदर जाते हैं साथ में रिंकी का भाई भी जाता है। घर के अंदर विणा और दो बच्चियों के शव को देख सब हैरान हो जाते हैं। चारो तरफ मातम का माहौल बन जाता है। किसी को कुछ समझ नही आ रहा था। पर अब भी रिंकी का कोई अता-पता नही था। अंदर जाकर जब दूसरे कमरे में देखा गया तो रिंकी घोष का शव कमरे में अर्धनग्न अवस्था में पलंग के बॉक्स में पाया गया। घटना की सूचना मिलते हीं मौके पर पुलिस अपनी टीम के साथ वहाँ पहुँचती है। और जाँच शुरू करती है। जाँच के बाद पुलिस नें चारों शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।  पुसिल ने रिंकी के साथ जबरदस्ती होने की भी आशंका जताई। और मीडिया से बात करते हुए ये बताया कि-  दीपक ने अपनी पत्नी और बेटियों को रविवार रात में हीं मार दिया था और रात भर शवों के साथ सोया। सुबह जब ट्यूशन टीचर आई तो उसकी भी हत्या कर दि, रौशन जब आया तो उनलोगों को भी मारने कोशिश की। उसके बाद से वो फरार है, उसका फोन भी बंद आ रहा है।
कुछ खबरों की माने तो उनके अनुसार हत्या प्रेम संबंध से संबंधित थी।

टीएमएच में इलाज के दौरान जब रौशन की पत्नी से पूछताछ हुई, तो आराध्या के अनुसार-  दीपक ने उन्हें लंच पर अपने घर बुलाया था। इसी बीच उनकी एक साल की बच्ची ने गाड़ी में हीं पॉटी कर दी तो वो उसे लेकर बाथरुम में चल गई। वहां से कमरे में लौटते समय चिल्लाने की आवाज आई। पति दौड़कर कमरे में गए तो देखा- सोफे पर बैठे अंकित पर दीपक हथौड़े से हमला कर रहा है।  आराध्या ने बताया -दीपक पहले सोपोडेरा में रहता था। माता-पिता की मौत के बाद वो कदमा के क्वार्टर में आया था। दीपक को वो मामा बुलाती थी।  वो आगे कहते हुए बताती है -दीपक का छत्तीसगढ़ में हाइवा चलता है। उसके पति रौशन का भी हाइवा चलता है। वे कुछ माह पहले टेल्को में शिफ्ट हुई है। सोमवार सुबह 9.30 बजे दीपक ने फोनकर लंच पर बुलाया। तबीयत ठीक नहीं थी। फिर दोबारा दोपहर 1 बजे दीपक ने अपनी पत्नी के फोन से उसे कॉल कर लंच पर बुलाया। इसके बाद वह ढाई बजे के बाद कदमा पहुंची।
पति ने अंकित को बचाया तो दीपक ने बच्ची को मारने का प्रयास किया। दीपक ने पति पर भी हथौड़ी से हमला किया। किसी तरह से पति ने मुझे, बच्ची और अंकित को बचाकर बाहर निकाला। वहां से भागकर टीएमएच पहुंचे। जहां से पति ने दीपक के साले (विनोद) को फोन किया।

इनसभी वारदातों को अंजाम देकर दीपक वहाँ से अपनी बुलेट ले के फरार हो गया था। उसका कुछ पता नही चल पा रहा था। एक तो उसका फोन बंद आ रहा था और उसका कोई सोशल मीडिया प्रोफाइल भी खुला नही था। उसने बड़ी चालाकी से सब कुछ बंद कर रखा था। उसका कोई सुराग नही मिल रहा था।

दीपक को पकड़ने के लिए कई अलग-अलग टीमों का गठन किया गया था। घटना के बाद शुक्रवार को SSP ने कदमा थाना प्रभारी और DSP Headquater 2 के साथ बैठक की उसी दौरान उन्हें मैसेज आया कि HDFC bank के खाते में डेढ़ लाख रुपयों का लेन देन हुआ है।पुलिस ने तुरंत जमशेदपुर के HDFC Bank से संपर्क कर धनबाद के हीरापुर ब्रांच से CCTV फुटेज मंगाया। इसी बीच पुलिस ने हीरापुर के बैंक मैनेजर से संपर्क कर दीपक की फ़ोटो दिखाई तो बैंक मैनेजर ने उसे पहचान लिया।

इसके बाद क्या हुआ इसकी जानकारी शनिवार 17अप्रैल को एसएसपी(SSP) डॉक्टर एम तमिल वाणन ने बिष्टुपुर थाना परिसर में प्रेसवार्ता करते हुए दी। 
उन्होंने बताया कि दीपक web series देखा करता था। उसने असुर एवं पाताललोक वेब सीरीज देखकर, हत्या का ताना-बाना बुना और हत्या पाताल लोक के कैरेक्टर हथौड़ा त्यागी की तरह बेरहमी से किया। दोस्तों से मिले धोखे के बाद मर्डर मिस्ट्री वाली वेब सीरीज ने उसे साइको किलर बना दिया। बीवी-बच्चों की हत्या करने के ठीक पहले भी उसने पाताललोक वेब सीरीज देखी थी। उसे हमने कल धनबाद से गिरफ्तार कर लिया है।

उन्होंने बताया कि- रविवार रात नहीं, सोमवार सुबह 12 तारीख को 8.00 से 8.30 के बीच बीवी बच्चों की हत्या की।
एसएसपी ने बताया कि दीपक ने पूछताछ में बताया है कि रविवार रात पड़ोस में बच्चे की बर्थडे पार्टी से लौटने के बाद सभी घर आकर सो गए। पर वह जागकर पाताललोक वेब सीरीज देखता रहा। सुबह 5.30 बजे उसकी पत्नी वीणा जग गई। उसने वीणा से बातचीत भी की। कुछ देर बाद वीणा दूसरे कमरे में जाकर फिर से सो गई। सुबह 8.00 से 8.30 बजे के बीच उसने पीछे से हथौड़ा से हमला कर पहले वीणा को मार दिया। इसके बाद कमरे में सो रही दोनों बेटियों दिव्या और श्रावणी पर भी हथौड़ा से हमला कर और तकिये से मुंह दबाकर जान से मार दिया।
आगे बताते हुए बोले- प्राप्त जानकारी के अनुसार दीपक ने परिवार व ट्यूशन टीचर को मारने के बाद रौशन और प्रभु गुप्ता को मारने की योजना बनाई थी। इसी के लिए उसने रौशन को फोन करके बुलाया था। और रौशन अपनी बीवी आराध्या, बेटी अंशु और साले अंकित को भी लेकर पहुंच गया। हालांकि उनके पहुंचने के बाद दीपक ने सभी को मार देने की सोची थी, पर आराध्या ने घर से बाहर निकलकर शोर मचा दिया व लोगों को बुलाकर उसका खेल बिगाड़ दिया। इसके कारण उसे घर से भागना पड़ा। वरना रौशन को मारकर घर मे रखने के बाद उसका इरादा प्रभु गुप्ता को भी मारने का था। सुबह, पत्नी और बेटियों को मारने के बाद, फिर नहाया, अपने ससुराल गया, जेवर लिया, दुकान में बेंचा तो 3 लाख पैसा नगद मिला। वो पैसे लेके वो घर आया। (वैसे न्यूज़ चैनल वालों को आपने बयान में वीणा के भाई विनोद ने ये बातया था कि वो घर आया था तो, आराम से खाया-पिया, ऐसा लग ही नही रहा था कि इतना बड़ा कांड करके आया है वो)

ssp कहते हैं- घर आने के बाद वो फिर वेब सीरीज देखा। हत्या की पहली वाली रात भी वो पाताल लोक वेब सीरीज देख रहा था। तब तक टीचर आई। वो उसको चाकू दिख कर स्कूटी की चाभी माँग रहा था, वो डर गई थी और चिल्लाना शुरू कर दी। तो दीपक ने उसे भी मार दिया। दरिंदगी की सारी सीमाएँ लांघते हुए उसने टीचर रिंकी घोष के साथ गलत किया बलात्कार किया। टीचर की स्कूटी की चाभी दीपक इसलिए माँग रहा था ताकि उससे वो प्रभु से मिलने जाए और उसकी हत्या कर दे। लेकिन रौशन के साथ उसकी बीबी, बच्ची और साले ने आकर उसके सारे प्लान पर पानी फेर दिया। रौशन लोग जब भाग निकले तो इसे अपने पकड़े जाने का डर हुआ तो दीपक bullet और लैपटॉप बैग लेकर, घर मे टाला बंद कर वहाँ से फरार हो गया। 

उसके बाद 3 दिनों तक लगातार अपना लोकेशन बदलता रहा। घटना को अंजाम देने के बाद सोमवार दोपहर लगभग 3:00 बजे मौका ए वारदात पर से फरार होने के बाद दीपक टाटानगर रेलवे स्टेशन से राजनगर से चाईबासा होते हुए राउरकेला पहुंचा। जहां रायरंगपुर में उसकी बुलेट पंचर हो गई। एक पंचर दुकान में गाड़ी को लगाने के बाद वो वहाँ से कार बुक करके पूरी रवाना हो गया। 13 अप्रैल रात 8:30 बजे पुरी पहुंचने के बाद वो कार ड्राइवर के नाम से देववाणी नामक होटल में कमरा लिया। रात में होटल में रुकने के बाद वह दिन भर पुरी घूमता रहा। 14 अप्रैल की रात 8:30 बजे 10 हजार रुपए में कैब बुक कर वो वहाँ से रवाना हो गया। सरायकेला, चांडिल होते हुए रांची पहुंचा। यहां उसने कैब ड्राइवर के नाम से कमरा बुक कराया। 14 की शाम उसने रांची में शॉपिंग की और आकर होटल के एक कमरे में रात गुजारी। 15 अप्रैल को एक दूसरी कैब बुक करने के बाद वह रामगढ़ से बोकारो होते हुए शाम 8.30 बजे धनबाद पहुंचा और यहां फिर से एक कैब ड्राइवर के नाम से सूर्या होटल में कमरा बुक कराया।

16 अप्रैल की सुबह 11.00 बजे दीपक धनबाद में एचडीएफसी बैंक की ब्रांच में पहुंचा और भाई मृत्युंजय के खाते में डेढ़ लाख रुपए ट्रांसफर करने को कहा। पर गाइडलाइन के कारण उसका पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका। इसको लेकर दीपक ने बैंक में जमकर हंगामा किया। इधर जमशेदपुर पुलिस ने दीपक के बैंक अकॉउंट को सर्विलांस पर रख रखा था। ऐसे में फंड ट्रांसफर का प्रयास होते ही जमशेदपुर पुलिस को मैसेज अलर्ट प्राप्त हुआ। स्थानीय एचडीएफसी बैंक ब्रांच से धनबाद की उक्त ब्रांच का नंबर प्राप्त कर संपर्क किया गया और पैसा ट्रांसफर करने वाले का सीसीटीवी फुटेज मांगा गया, साथ ही दीपक की फ़ोटो भेजी गई। बैंक कर्मियों ने तुरंत ही दीपक की पहचान कर ली। इसके बाद जमशेदपुर से दोपहर करीब 2.10 बजे पुलिस टीम धनबाद के लिए रवाना हो गई। तभी 2.30 बजे धनबाद एचडीएफसी ब्रांच से फोन आया कि दीपक फिर से ब्रांच में पहुंचा हुआ है। जमशेदपुर के डीएसपी कमल किशोर ने लंच ब्रेक का बहाना बताकर ब्रांच का शटर बंद करने को कहा और धनबाद की स्थानीय पुलिस को तत्काल पहुंचकर दीपक को गिरफ्तार करने को कहा। धनबाद पुलिस ने फौरन पहुंचकर दीपक को गिरफ्तार किया। इसके बाद 16 अप्रैल की रात 9 बजे जमशेदपुर पुलिस दीपक को धनबाद से लेकर जमशेदपुर कंव लिए रवाना हो गई।

हत्या के कारण पे पूछताछ में दीपक ने बातया की
उसे सोपोडेरा के रहने वाले दोस्त प्रभु गुप्ता और उसके भतीजे रौशन से व्यापार में धोखा मिला था।
प्रभु गुप्ता ने दीपक का सोपोडेरा स्थित मकान बहला-फुसलाकर बिकवा दिया था। इसके बाद उसने अपना पुराना डम्पर भी दीपक को महंगे दाम में बेच दिया था। वहीं रौशन ने भी ट्रांसपोर्ट व्यापार में उससे करीब 5 लाख रुपए उधार लिए थे। जिन्हें वह लौटा नहीं रहा था। इसलिए दीपक ने सबसे पहले प्रभु गुप्ता और रोशन को ही जान से मारने की साजिश बनाई थी। पर उसने सोचा कि इसके बाद उसके परिवार को काफी परेशान होना पड़ेगा, इसलिए पहले परिवार को मार दिया, उसके बाद रोशन और उसके साले पर हमला किया। इसके बाद वो प्रभु को भी मारने की फिराक में था। पर चार हत्याओं के राज खुलने के कारण वह मौके से फरार हो गया।

जमशेदपुर लाने के बाद दीपक को रात 3 बजे घटना स्थल, कदमा के तिस्ता रोड क्वार्टर नंबर 97N पर ही ले जाया गया। जहां पुलिस ने रात भर उससे पूछताछ की। इस दौरान दीपक की निशानदेही पर ट्यूशन टीचर का हाथ व मुंह बांधने वाला टेप, घटना में प्रयुक्त चाकू, मुख्य दरवाजे की चाभी, नगद एक लाख रुपया, पुरी वह धनबाद में होटल में रुकने की पर्ची, एक पैनकार्ड, 3 एटीएम कार्ड, एक सादा चेक, बुलेट की चाभी, एक मोबाइल फ़ोन व एक घड़ी बरामद की। SSP ने बताया कि राउरकेला से उसकी बुलेट जब्त करने के लिए टीम भेज दी गई है।
उन्होंने ये भी बोला की जो कोई खबर चला रहे थे कि दीपक और रिंकी का कोई प्रेम संबंध है तो इससे दीपक ने इनकार किया है।
आखिर में उन्होंने ये कहा कि- उसने अपने परिवार को खत्म कर दिया है, लेकिन उसके आँख में एक बूँद आँसू भी नही है। उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने और उसके पागलपन की वजह से उसने क्या किया है उसका थोड़ा भी एहसास नही है।

दीपक की गिरफ्तारी में एसएसपी और सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट की अध्यक्षता में गठित टीम की अहम भूमिका रही। इसमें डीएसपी हेड क्वार्टर-2 कमल किशोर, कदमा थाना के प्रभारी मनोज ठाकुर, एसआई हर्षवर्धन सिंह, एसआई नितेश कुमार ठाकुर, एसआई बसंती टुडू, सोनारी थाना की एसआई शशिबाला भेंगरा व महिला थाना प्रभारी जेनी सुधा तिग्गा की अहम भूमिका है।