सब्जी के बाद अब खरबूज, तरबूज 30 के बदले 10 रुपए में बिक रहे, मांग घटने से कम दाम में बेचना मजबूरी

कोरोना महामारी के कारण प्रदेश में मिनी लाॅकडाउन चल रहा है। इस कारण से अनुमंडल के विभिन्न इलाके में उत्पादित होने वाली सब्जी की सप्लाई अन्य स्थानों में बहुत कम हो रही है। अधिकांश सब्जी खेतों में लगी-लगी ही खराब हो रही हैं। कोरोना की मार से पहले सब्जी की फसल बर्बाद हुई, अब तरबूज की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। किसान 25 से 30 रुपए किलो बिकने वाले खरबूज, तरबूज को 8-10 रुपए किलो बेचने को मजबूर हैं।

गालूडीह के जोड़िसा के किसान शंकरलाल महतो ने बताया उन्होंने चार एकड़ में तरबूज लगाया है। लेकिन मांग कम होने के कारण भाव बहुत कम मिल रहा है। यदि इसे कम भाव में भी नहीं बेचते तो खेत में लगा-लगा तरबूज सड़ जाएगा। इसलिए मजबूरी में कम भाव में ही बेचना पड़ रहा है। इसी तरह से बड़खुर्शी के किसान मनसाराम महतो ने बताया उन्होंने भी करीब एक एकड़ में तरबूजा लगाया है। लेकिन भाव कम मिल रहा है। अधिकांश मंडियां बंद होने से खेत से ही व्यापारियों को माल दे रहे हैं। पिछले साल की तुलना में बहुत कम भाव मिल रहा है। किसानों की लागत तक नहीं निकल रही है। इसी तरह से जिले के अन्य किसान भी परेशान हो रहे हैं।

गांव के लोग फ्री में ले जा रहे

तरबूज बिक्री नहीं होने के कारण गांव के लोग खेतों से फ्री में तरबूज ले जा रहे हैं। व्यापारी भी बहुत कम खेतों तक तरबूज लेने आ रहे हैं। किसानों ने बताया रोजाना ऐसे ही लोगों को फ्री में तरबूज देने पड़ रहे हैं। यदि नहीं दिए तो ये सड़ जाएंगे। एक समय था जब किसान के खेत से ही व्यापारी तरबूज खरीदकर ले जाते थे। लेकिन व्यापारी ज्यादा पका हुआ तरबूज नहीं खरीद रहे हैं। किसानों ने बताया यदि कोरोना महामारी नहीं चल रही होती तो ज्यादा पके तरबूजे भी बिक जाते।