अपनी सत्ता की रोटी सेकने के लिए टीके को लेकर राजनीति करना ठीक नहीं

अपनी सत्ता की रोटी सेकने के लिए टीके को लेकर राजनीति करना ठीक नहीं

वर्तमान समय में केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर इस वर्ष टीकाकरण को सभी नागरिकों तक पहुंचाने के लक्ष्य में जुटी है. इसका सीधा लाभ जनता और देश के स्वास्थ्य से जुड़ा है. इसमें किसी भी पार्टी के द्वारा अपना राजनीतिक लाभ लेना उचित नहीं. हम टीके की उपलब्धता को लेकर सरकार के द्वारा की जा रही है मशक्कत को साफ देख पा रहे हैं. ऐसे में कई ऐसी पार्टियां हैं जो टीके को लेकर राजनीति करने में जुटी हैं. उन्हें यह सोचना होगा उनके ऐसा करने पर जनता पर कैसा प्रभाव पड़ेगा? अभी हमने हाल फिलहाल में देखा कि समाजवादी पार्टी के नेता तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने टीके को लगवाने से मना कर दिया. उनका कहना था कि वह केंद्र सरकार के द्वारा लगाए गए जा रहे टीकों को नहीं लगाएंगे. हद तो तब हो गई जब उन्होंने अंत में यह कह दिया कि जब उनकी सरकार आएगी तब वह टीका लगवाएँगे और बाकी लोगों को भी मुफ्त में देंगे. यह उनका यह कहना लोकतंत्र की दृष्टि से भी उचित नहीं है और एक अच्छे राजनेता होने के तौर पर भी ठीक नहीं.

केवल अखिलेश यादव ही नहीं वैक्सीन को लेकर बंगाल में भी, महाराष्ट्र में भी, कई जगहों पर राजनीति देखने को मिली है. इन सभी राजनीतिक पार्टियों को एक बात सोचना होगा कि ऐसा करने से नो न तो उन्हें लाभ मिलने वाला है, और ना ही किसी को राजनीतिक हानि होने वाली है. हालांकि बाद में हुआ वही जिसके आसार दिखाई दे रहे थे, आखिरकार अखिलेश यादव ने वैक्सीन लगवाई और यह कहा कि हम बीजेपी के द्वारा नहीं बल्कि भारत सरकार के द्वारा लगवाई गई वैक्सीन लगाएंगे. अब यह तो वही जानें कि ऐसा करने से उन्हें कौन सा राजनीतिक लाभ मिला. परंतु इस वक्त जिस परिस्थिति से देश गुजर रहा है ऐसे समय में पक्ष हो या विपक्ष हो, सबको एक जुट होकर सरकार का साथ देना चाहिए, ताकि हम इस भयानक महामारी से खुद को जल्दी बाहर निकाल पाएँ.