ओडिशा में रथ यात्रा आज , जाने क्या है सरकार के नियम

ओडिशा में आज रथयात्रा है। पिछले डेढ़ साल से चल रहे इस कोरोना महामारी के वजह से ओडिशा सरकार ने इस बार बीना श्रद्धालुओं के रथ यात्रा करने का फैसला किया है।

ओडिशा में रथ यात्रा आज , जाने क्या है सरकार के नियम

ओडिशा में आज रथयात्रा है। पिछले डेढ़ साल से चल रहे इस कोरोना महामारी के वजह से ओडिशा सरकार ने इस बार बीना श्रद्धालुओं के रथ यात्रा करने का फैसला किया है। पुरी में शनिवार से ही कर्फ्यू लगा दिया गया है। और किसी को भी घर के छत या होटल के छत पर से देखने की अनुमति नहीं है। पिछले साल भी इस महामारी के वजह से बिना श्रद्धालुओं के रथ यात्रा की गई थी। इस उत्सव का पूरा प्रसारण टीवी पर किया जाएगा। ओडिशा सरकार ने लोगों से अनुरोध किया है कि वह टीवी पर इसका पूरा प्रसारण देखें। 

पुरी का ये जगन्नाथ मंदिर पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण, बलराम और उनकी बहन सुभद्रा की मूर्ति है। इस उत्सव की शुरुआत होने के पीछे कई सारी कहानियां है। इनमें से एक बहुत प्रसिद्ध है जो मैं आपको बताती हूं। 

कहा जाता है , सुभद्रा अपने मायके आती है और अपने भाई कृष्ण और बलराम से नगर का भ्रमण करने की बात कहती है। इसके बाद कृष्ण और बलराम अपनी बहन की इच्छा पूरी करते हैं , और रथ पर बैठकर तीनों नगर को देखने निकलते हैं। यहां से हुई थी इस उत्सव की शुरुआत। तब से लेकर आज तक इस उत्सव को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। 

इस रथयात्रा में उपयोग किए गए रथ की ऊंचाई 45 फीट और व्यास 7 फीट होती है । इसमें कुल 16 पहिए होते हैं। पूरे रथ को सुंदर फूलों से सजाया जाता है। 

इस उत्सव में कई श्रद्धालु शामिल होते हैं। पूरे नगर में श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है। पूरे नगर में उत्साह और खुशी का माहौल देखा जाता है । इस त्यौहार की तैयारी लोग महीनों से करते हैं और काफी हर्ष और उल्लास के साथ इसे मनाएं मनाया जाता है। लेकिन पिछले दो साल से इस महामारी के कारण लोग रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। उम्मीद है कि यह अंतिम वर्ष हो जब रथ यात्रा में श्रद्धालुओं की भीड़ न देखी जा रही हो। हमारी भगवान से यही प्रार्थना है कि पूरा विश्व इस