दोस्त की जान बचाने के लिए 24 घंटे में तय किया 1400 KM

गजब की दोस्ती बोकारो से ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर नोएडा पहुंचा दोस्त 24 घंटे में कार से तय किया 1400 किलोमीटर की दूरी । 


देशभर में कोरोनावायरस की वजह से हाहाकार मचा हुआ है। 
इस दौरान कोरोना और आईसीयू बेडस के साथ ऑक्सीजन का संकट बढ़ता जा रहा है । यही नहीं ,कई खबर ऐसे भी आ रही है कि कोरोना मरीज  को अपने ही अस्पताल के बाहर छोड़कर गायब हो रहे हैं । तो कोई कोरोना  से जान गंवाने वाले का शव लेने से इंकार कर रहा है। इस बीच दोस्त की जान बचाने के लिए बोकारो से 1400 किलोमीटर का सफर कार से तय कर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर नोएडा पहुंचने वाले पेशे से शिक्षक देवेंद्र की जमकर चर्चा हो रही है। 


दरअसल बोकारो में रहने वाले वीरेंद्र पेशे से शिक्षक है। तो नोएडा में रहने वाले उनके दोस्त रंजन अग्रवाल दिल्ली के एक आईटी कंपनी में काम करते हैं। इस समय रंजन करोना संक्रमण की चपेट में हैं ।और उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार गिरता जा रहा था। लेकिन ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी । वही डॉक्टर ने साफ कह दिया की मरीज की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। 


इस बीच  बोकारो मैं रहने वाले देवेंद्र को दोस्त की जान को खतरा होने की बात पता चली तो वह ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था में जुट गया । इस दौरान उन्होंने बोकारो में कई प्लांट और सप्लायर का दरवाजा खटखटाया। लेकिन बिना खाली सिलेंडर के कोई भी ऑक्सीजन देने को तैयार नहीं हुआ। हालांकि इसके बाद भी देवेंद्र ने हिम्मत नहीं हारी और फिर उनका प्रयास रंग लाया। इसके बाद एक अन्य मित्र की मदद बियाडा  स्थित झारखंड  इस्पात ऑक्सीजन प्लांट के संचालक से संपर्क कर उन्हें परेशानी बताई तो वह तैयार हो गए। लेकिन उसने ऑक्सीजन सिलेंडर की सिक्योरिटी मनी जमा करने की शर्त रखी। इसके बाद वीरेंद्र ने जंबो सिलेंडर के लिए ₹10000 दिए जिसमें ₹400 ऑक्सीजन की कीमत और ₹9600 सिलेंडर की सिक्योरिटी मनी थी । 


ऑक्सीजन सिलेंडर मिलने के बाद देवेंद्र खुद रविवार सुबह अपनी कार से नोएडा के लिए निकल पड़े और करीब 24 घंटे में पहुंच गए हालांकि इस दौरान राज्य के बॉर्डर पर उनसे पुलिस ने पूछताछ भी की लेकिन दोस्त की जान बचाने की बात ने उन्हें रुकने नहीं दिया। 


यही नहीं जब देवेंद्र सिलेंडर लेकर दिल्ली पहुंचे तो रंजन अग्रवाल की आंखें भर आई। इसके बाद उन्होंने कहा कि ऐसे दोस्त के रहते कोरोना भला मेरा क्या बिगाड़ लेगा । वही रंजन के जाने वालों ने भी कहा कि भगवान ऐसा दोस्त सभी को दें। वही बोकारो से नोएडा आने वाले वीरेंद्र अब अपने दोस्त के स्वस्थ होने तक यहीं रहेंगे।


देवेंद्र के जसबीर को हम सलाम करते है ।देवेंद्र ने साबित कर दिया कि मुसीबत में सच्चे दोस्त ही काम आते हैं। और अपनी दोस्ती की मिसाल दे दी।