यूपी: प्रशासन ने ढहाई 100 साल पुरानी मस्जिद, अखिलेश बोले- BJP की सांप्रदायिक राजनीति 

यूपी: प्रशासन ने ढहाई 100 साल पुरानी मस्जिद, अखिलेश बोले- BJP की सांप्रदायिक राजनीति 

उत्तर प्रदेश के बारबंकी में 100 साल पुरानी मस्जिद को ढहाने पर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है. एक तरफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और वक्फ बोर्ड ने इस कार्रवाई को गलत बता दिया है तो वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति से जोड़ दिया है. 100 साल पुरानी मस्जिद को बड़ा मुद्दा बनाते हुए अखिलेश यादव ने राज्य की बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा है.

अखिलेश यादव ने कहा कि शासन-प्रशासन का यह कार्य भारतीय संविधान के सामाजिक सद्भाव की अवधारणा के खिलाफ है. यूपी में चुनाव निकट आता देख भाजपा सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने में सक्रिय हो गई है. देश की गंगा जमुनी संस्कृति को बिगाड़कर बीजेपी अपनी राजनीति करती रही है. भाजपा नफरत की राजनीति से धार्मिक उन्माद फैलाना चाहती है. जनता को इससे सतर्क रहने की आवश्यकता है. सौ वर्ष पुरानी मस्जिद को तोड़ना सत्ता का दुरुपयोग है. भाजपा का ऐसे कृत्यों में संलिप्त रहने का इतिहास रहा है.

अखिलेश यादव ने बीजेपी पर साधा निशाना

सपा प्रमुख की तरफ से मांग की गई कि इस मस्जिद का जल्द से जल्द पुर्ननिर्माण करवाया जाए. वैसे इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन को घेरने के लिए समाजवादी पार्टी की तरफ से एक 9 सदस्यीय टीम भी बना दी गई है जिसमें 3 पूर्व कैबिनेट मंत्री,3 विधायक समेत पूर्व सांसद शामिल हैं.

इस लिस्ट में  मुख्य रूप से पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविन्द सिंह गोप,राकेश वर्मा, पूर्व मंत्री फरीद मेहफूज किदवाई, पूर्व सांसद राम सागर रावत शामिल हैं जो बाराबंकी भी जाएंगे और इस मामले पर लगातार अपनी नजर भी रखेंगे.

इस बारे में पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप ने बताया कि 100 साल पुरानी मस्जिद को गिराने की घटना बहुत ही निंदनीय है. सपा प्रमुख के आदेश पर ज़िलाधिकारी से वार्ता करने के लिए समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधि मंडल जाएगा और जो भी अधिकारी दोषी हो उन पर कड़ी कार्रवाई हो, ऐसी मांग करेगा.

प्रशासन ने बताया अवैध निर्माण

बता दें कि इस मस्जिद को लेकर राजनीति जरूर हो रही है लेकिन तहसील प्रशासन की तरफ से इसे अवैध निर्माण बताया गया है. इस बारे में जिलाधिकारी आदर्श सिंह ने कहा है कि 15 मार्च को नोटिस देकर संबंधित पक्षकारों को सुनवाई का पूरा मौका दिया गया था. लेकिन उस नोटिस के बाद वो लोग वहां से फरार हो गए और 18 मार्च को इस मस्जिद को तहसील प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया.