Tips for happy life

जिंदगी में खुशियां पाने की चाबी

Tips for happy life

शुन्य से मंजिल की ओर:-

मंजिल की चाह किसे नहीं होती हर इंसान की कोई ना कोई मंजिल भी होती है जिससे वह हर हाल में पाना चाहता है पर किस रास्ते पर जाना है कैसे पाना है इस कशमकश में अपनी जिंदगी बताता रहता है। उस मंजिल तक पहुंचने में अपना चैन सुकून सब कुछ दांव पर लगा देते है। फिर भी कई बार मंजिल नहीं मिलती क्या मिल भी जाए तो सुकून नहीं मिलती। मंजिल और सुकून दोनों चाहते हैं, फिक्र को धुएं में उड़ाना सीखे।कभी-कभी हमें इंतजार करना चाहिए परमात्मा के प्लान का जो हमारे जीवन में वह स्थापित करना चाहता है आज मैं आपसे साझा करूंगा, अपनी कुछ राय जिंदगी को खुशियों से भर दे और सुकून से जीने के लिए आपके बेहद काम आ सकती है।

मैं शुरुवात करता हूं  "साहिर साहब " के एक गाने से करता हूं - " जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया , और जो खो गया उसे भुलाता चला गया और हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया - हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया " फिर मेरी क्या फिक्र ? सारे फिक्र को छोड़ दें उस परमात्मा के उपर ,और नए साल की खुशियों के साथ अपनी जीवन की शुरुवात करें । बचपन में हम स्कूल में एक खेल खेला करते थे - चम्मच में नीबू रखकर उसे मुंह से पकड़कर हमे मंजिल तक जाना पड़ता था, लगभग सभी लोग मंजिल तक पहुंच ही जाते थे मगर ज्यादातर लोगों की नीबु रास्ते में ही गिर जाती थी वो सिर्फ खाली चम्मच के साथ ही मंजिल तक पहुंच पाते थे । इसे जितना नहीं कहते दोस्तो ! बल्कि इसे हारना कहते हैं । बस- वही मै आप सबको समझाना चाहता हूं । जिंदगी की इस दौड़ में सभी अपनी अपनी मंजिल (कमाने) में इतने व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें पता ही नहीं चल पाता कि वो अपने पीछे क्या क्या छोड़ बैठे? दोस्त ,परिवार ,स्वास्थ्य,सुख शांति सभी को छोड़ कर कुछ धन कमा लिए तो इसे भी जितना नहीं बल्कि जिंदगी की सबसे बड़ी जंग हारना ही कहते हैं । हरिवंश राय जी भी बहुत अच्छी बाते कही है - छोटे से जीवन में कितना प्यार करूं ? पी लूं हाला ! ( 70-80 साल की तो जीवन ही है ) आने के साथ ही जगत में , कहलाया जाने वाला । स्वागत के साथ ही मैंने देखी विदाई की तैयारी ।। धन्यवाद ! नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं। ।।

यह पोस्ट हमारे साथ साझा की है विजय कुमार सिन्हा जी ने (सेक्रेटरी रांची झारखंड अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार) इनकी खासियत यह है कि यह स्पिरिचुअलिटी में खासा इंटरेस्ट है। यह इंटेलेक्चुअल होने के साथ-साथ मानव धर्म को सर्वोपरि समझते हैं और साथ ही हुमन साइकोलॉजी में भी उनकी खासा दिलचस्पी है।इस पोस्ट में लिखी गई बातें विजय कुमार सिन्हा जी की अपनी राय है।